Mera School Nibandh in Hindi: मेरे स्कूल पर निबंध हिंदी में

Mera School Nibandh in Hindi: नमस्ते दोस्तों! आज मैं मेरे स्कूल पर निबंध हिंदी में लिख रहा हूँ। मेरा स्कूल मेरे जीवन का सबसे प्यारा हिस्सा है। जब भी मैं सुबह स्कूल की घंटी सुनता हूँ, तो मेरे मन में खुशी की लहर दौड़ जाती है। स्कूल वह जगह है जहाँ मैं रोज नई-नई बातें सीखता हूँ, दोस्तों के साथ खेलता हूँ और बहुत सारे अच्छे सपने देखता हूँ। मेरे स्कूल का नाम है सरस्वती विद्यालय। यह छोटा-सा लेकिन बहुत सुंदर स्कूल है। मेरे घर से बस दस मिनट की दूरी पर है। वहाँ पहुँचते ही मैं दौड़कर कक्षा में चला जाता हूँ।

मेरा स्कूल बहुत हरा-भरा है। सामने बड़ा-सा मैदान है जहाँ हम सब बच्चे दोपहर के समय क्रिकेट और कबड्डी खेलते हैं। मैदान के किनारे दो आम के पेड़ हैं। गर्मियों में जब पत्तियाँ हिलती हैं तो हल्की ठंडी हवा आती है। कक्षाएँ भी बहुत साफ-सुथरी हैं। दीवारों पर रंग-बिरंगे चित्र बने हैं – पक्षी, फूल और छोटे-छोटे जानवर। हर कक्षा में एक बड़ा ब्लैकबोर्ड है। मेरी कक्षा में खिड़कियाँ इतनी बड़ी हैं कि बाहर का पूरा आकाश दिखता है। बारिश के दिनों में जब पानी की बूँदें खिड़की पर गिरती हैं, तो हम सब चुपचाप बैठकर बाहर देखते हैं और सोचते हैं कि आज खेल कैसे खेलेंगे।

मेरी टीचर बहुत प्यारी हैं। वे हमें पढ़ाती हैं तो लगता है जैसे माँ पढ़ा रही हों। एक दिन मैं स्कूल आया तो बहुत उदास था। घर पर मेरी छोटी बहन बीमार थी। टीचर ने देखा और पूछा, “बेटा, क्या हुआ?” मैंने बताया। उन्होंने मुझे गले लगाया और कहा, “चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।” फिर उन्होंने पूरी कक्षा को मेरी बहन के लिए प्रार्थना करवाई। शाम को घर पहुँचा तो बहन बेहतर लग रही थी। मुझे लगा कि टीचर की दुआ और प्यार से सब कुछ अच्छा हो जाता है।

मेरे दोस्त भी स्कूल की सबसे बड़ी खुशी हैं। मेरा सबसे अच्छा दोस्त राहुल है। हम दोनों हमेशा साथ बैठते हैं। एक बार मैंने अपना लंच बॉक्स घर भूल गया। राहुल ने अपना आधा पराठा और दही मुझे दे दिया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे यार, दोस्त के बिना भूखे कैसे रह सकते हैं!” उस दिन मुझे समझ आया कि सच्चा दोस्त वही है जो मुसीबत में साथ दे। हम साथ में होमवर्क करते हैं, साथ में गाना गाते हैं और साथ में स्कूल की बस में हँसते-खेलते आते-जाते हैं।

दादाजी भी कभी-कभी स्कूल के बारे में कहानियाँ सुनाते हैं। वे कहते हैं, “बेटा, हमारे समय में स्कूल में बेंच नहीं थे। हम जमीन पर बैठकर पढ़ते थे। लेकिन मजा उतना ही था।” उनकी बात सुनकर मैं सोचता हूँ कि स्कूल चाहे कितना भी पुराना हो, वहाँ सीखने का मज़ा कभी नहीं बदलता। दादाजी ने मुझे एक बात सिखाई – “पढ़ाई के साथ-साथ दूसरों का भी ख्याल रखो।”

हमारे स्कूल के पास एक छोटा-सा कुत्ता रहता है। उसका नाम हमने “भोला” रखा है। भोला सफेद रंग का है और उसकी पूँछ हमेशा हिलती रहती है। सुबह जब हम स्कूल आते हैं तो भोला गेट पर खड़ा हमारा इंतजार करता है। हम सब उसे बिस्कुट और रोटी के टुकड़े देते हैं। एक दिन बारिश हो रही थी। भोला भीग रहा था। मैंने अपनी रेनकोट उतारकर उसे ओढ़ा दिया। टीचर ने देखा और मुस्कुराईं। उन्होंने कहा, “बहुत अच्छा किया बेटा। जानवरों से प्यार करना सीख लो, तो इंसान भी तुमसे प्यार करेगा।” उस दिन मुझे लगा कि भोला भी खुश है। उसकी आँखों में शायद यही कह रहा था, “तुम सब मेरे अच्छे दोस्त हो।” इस छोटी-सी घटना से हम सबने सीखा कि दया और मदद करना कितना अच्छा लगता है।

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स्कूल में हर दिन कुछ न कुछ नया होता है। कभी स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराते हैं, कभी गणतंत्र दिवस पर नाचते-गाते हैं। मेरी सबसे पसंदीदा बात है प्रार्थना सभा। सब बच्चे एक साथ खड़े होकर “सूरज की किरणें…” गाते हैं। उस समय पूरा स्कूल एक परिवार जैसा लगता है।

मुझे अपने स्कूल से बहुत प्यार है। यहाँ आकर मैं बड़ा हो रहा हूँ। यहाँ सीख रहा हूँ कि किताबों से ज्यादा जीवन की किताब पढ़नी है। दोस्तों, अगर तुम भी अपने स्कूल से प्यार करते हो तो रोज उसे याद करो और अच्छे से पढ़ो। स्कूल ही हमें सपने देता है और उन्हें पूरा करने की ताकत भी देता है।

मेरा स्कूल मेरा दूसरा घर है। यहाँ हर बच्चा हँसता है, सीखता है और आगे बढ़ता है। मैं अपने स्कूल को कभी नहीं भूलूँगा। तुम्हारा भी स्कूल कितना प्यारा होगा न? चलो, मिलकर अपने स्कूल को और बेहतर बनाएँ। जय हिंद!

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