Lockdown par Nibandh in Hindi: दोस्तों, आज मैं लॉकडाउन पर निबंध लिख रहा हूँ। लॉकडाउन का मतलब था कि सबको घर में रहना पड़ता था। स्कूल बंद, पार्क बंद और बाहर खेलना भी बंद। शुरू में मुझे बहुत अजीब लगा। लेकिन अब जब मैं इस बारे में सोचता हूँ तो मुस्कुरा देता हूँ। लॉकडाउन ने हमें परिवार के साथ समय बिताने का मौका दिया और बहुत सी अच्छी बातें सिखाईं।
जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तो मैं सुबह उठकर सोचता, “आज स्कूल नहीं जाना!” पहले तो खुशी होती, लेकिन फिर घर में घूमते-घूमते बोर होने लगता। मम्मी कहतीं, “बेटा, किताब पढ़ लो।” पापा काम से घर पर ही थे, तो हम साथ में चाय पीते और बातें करते। एक दिन मैंने पापा से पूछा, “पापा, लॉकडाउन कब खत्म होगा?” पापा ने हँसकर कहा, “जब सब ठीक हो जाएगा।” उस समय मैंने समझा कि सब्र रखना कितना जरूरी है।
घर में मेरे दादाजी भी थे। वे लॉकडाउन में रोज शाम को पुरानी कहानियाँ सुनाते। “बेटा, जब मैं छोटा था, तब भी मुश्किल समय आते थे। लेकिन हम साथ रहकर निकल जाते थे,” वे कहते। उनकी कहानी सुनकर मैं सोचता कि हमारे दादा-दादी कितने मजबूत थे। लॉकडाउन में हमने एक साथ बोर्ड गेम खेला, रंग-बिरंगे पेंटिंग बनाई और पुराने फोटो देखे। ये छोटी-छोटी बातें अब मेरी सबसे प्यारी यादें बन गई हैं।
मेरा कुत्ता टॉमी लॉकडाउन का सबसे बड़ा दोस्त बन गया। वह रोज सुबह मेरे पास आकर पूँछ हिलाता और कहता (जैसे) “चलो खेलते हैं!” पहले मैं स्कूल जाता तो टॉमी अकेला रह जाता। लेकिन लॉकडाउन में हम दोनों पूरे दिन साथ थे। मैं उसे बिस्किट खिलाता, घुमाता और बातें करता। एक दिन बारिश हो रही थी और बिजली चली गई। मैं डर गया। टॉमी मेरे पास आकर बैठ गया और मेरी तरफ देखकर पूँछ हिलाने लगा। उसकी आँखों में जैसे कह रहा था, “डरो मत, मैं हूँ ना।” उस पल मुझे लगा कि जानवर भी हमें प्यार और साथ निभाना सिखाते हैं। टॉमी ने मुझे सिखाया कि छोटी खुशियों में जीना सीखो और किसी को अकेला मत छोड़ो।
मेरे दोस्त राहुल और प्रिया से भी फोन पर बात होती। हम स्कूल की यादें शेयर करते। “याद है, लंच टाइम में हम सब क्रिकेट खेलते थे?” राहुल कहता। हम ऑनलाइन क्लास लेते, लेकिन क्लास के बाद एक-दूसरे को ड्रॉइंग भेजते। प्रिया ने एक दिन कहा, “लॉकडाउन में मैंने मम्मी के साथ केक बनाना सीख लिया!” मैंने भी मम्मी की मदद से चपाती बनाई। कभी-कभी जल जाती, लेकिन मम्मी हँसकर कहतीं, “कोई बात नहीं, अगली बार अच्छी बनेगी।” इन छोटी गलतियों से हमें सीख मिली कि कोशिश करते रहो, नतीजा अच्छा आएगा।
लॉकडाउन में हमने घर के बगीचे में भी काम किया। पापा के साथ टमाटर और धनिया उगाए। रोज पानी देते और देखते कि पौधे कैसे बढ़ रहे हैं। टॉमी भी बगीचे में घूमता और कभी पौधे खोदने की कोशिश करता। हम सब मिलकर हँसते। ये सब देखकर लगता कि प्रकृति भी हमारे साथ है। लॉकडाउन ने हमें सिखाया कि बाहर की दुनिया बंद होने पर भी घर के अंदर बहुत कुछ खूबसूरत है।
अब लॉकडाउन खत्म हो गया है और स्कूल फिर से खुल गए हैं। लेकिन मैं उन दिनों को कभी नहीं भूलता। लॉकडाउन ने हमें सिखाया कि परिवार सबसे बड़ा सहारा है। दोस्ती दूरियों में भी निभाई जा सकती है। और मुश्किल समय में भी हम हँस सकते हैं, सीख सकते हैं और मजबूत बन सकते हैं। मेरे दोस्तों, अगर कभी फिर कोई मुश्किल आए, तो याद रखो – टॉमी की तरह पूँछ हिलाओ, दादाजी की कहानी याद करो और घरवालों का हाथ थाम लो।
लॉकडाउन पर निबंध लिखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह समय हमें याद दिलाता है कि जीवन में सबसे जरूरी चीज प्यार और साथ है। हम सब मिलकर आगे बढ़ें, खुश रहें और एक-दूसरे की मदद करें। लॉकडाउन खत्म हुआ, लेकिन इसकी अच्छी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।
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